Red PURPLE BLACK

विशेष वार्ता

 लाईव्ह अपडेट :  शुभवार्ता >>  बीकेवार्ता पाठक संख्या एक करोड के नजदिक -  दिनदूगीनी रात चौगुनी बढरही  पाठकसंख्या बीकेवार्ता की ---- पाठको को लगातार नई जानकारी देनें मेे अग्रेसर रही बीकेवार्ता , इसी नवीनता के लिए पाठको का आध्यात्तिक प्यार बढा ---- सभी का दिलसे धन्यवाद --- देखीयें हमारी नई सेवायें >>>  ब्रहमाकुमारीज द्वारा आंतरराष्टीय सेवायें  | ब्रहमाकुमारीज वर्गीकत सेवायें |आगामी कार्यक्रम | विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस | विचारपुष्प |


 

FrontPage Slide Show

नया मलयालम टीवी चैनल

कोच्चि: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, माननीय। मुरलीधरन ने ब्रह्म कुमारियों का नया मलयालम चैनल लॉन्च किया - मलयाली को समर्पित राजयोग टीवी मलयालम। यह एक पूर्ण चैनल है जो हमारी ज़रूरत की हर चीज़ वितरित करता है। भारतीय दर्शन विज्ञान और अध्यात्म का सामंजस्य है। यह चैनल ब्रह्म कुमारियों की मानवता की समग्र दृष्टि का प्रमाण है। मंत्री ने अपने…

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश सरकार में पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री और प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह यादव, मुरैना जिला कलेक्टर, प्रियंका दास के साथ, प्रशासन की ओर से इस…

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु उपहार भवन, माधवगंज लश्कर ग्वालियर” द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में परामर्श देनें के लिए डॉ. निर्मला कंचन (स्त्री रोग विशेषज्ञ), एवं…

Advertising Top

 

  • सेवा समाचार - मॉरीशस में जीएचआरसी, माउंट आबू के डॉ। प्रताप मिधा का दौरा - 
    Mauritius Family
    This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.
  • Watch "प्रेरणा (Inspiration) (EP-120) Rajyogini Vanita Didi (Jetpur, Gujarat)" on YouTube -https://youtu.be/mBRBP12YcWA
  • भारत के भाई बीके चार्ली की सेवा रिपोर्ट (ऑस्ट्रेलिया) की यात्रा
  • बैंगलोर - ब्रह्मा कुमारियों ने पृथ्वी माता महोत्सव में "प्रकृति मित्र पुरस्कार" से सम्मानित किया

 

महत्वपूर्ण खबरे


Joomla Templates and Joomla Extensions by JoomVision.Com
नया मलयालम टीवी चैनल

नया मलयालम टीवी चैनल

कोच्चि: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, माननीय। मुरलीधरन ने ब्रह्म कुमारियों का नया मलयालम चैनल लॉन्च किया - मलयाली को समर्पित राजयोग टीवी मलयालम। यह एक पूर्ण चैनल है जो हमारी…Read more...
आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों…Read more...
19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन.

19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन.

19 मई (आबूरोड) आध्यात्मिकता और भौतिकता के संगम से होगा विश्व परीवर्तन. केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र. संस्था के 80 वर्ष कार्यक्रम में वक्तव्य.Read more...

अन्य ख़बरे

Joomla Templates and Joomla Extensions by JoomVision.Com
निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु…Read more...
आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों…Read more...
युवा शिविर का सफल आयोजन.

युवा शिविर का सफल आयोजन.

त्रिनिदाद) युवा शिविर का सफल आयोजन. टोका त्रिनिदाद मेंे हासन्ना बीच रिसोर्ट पर युवा शिविर का आयोजन किया गया. Read more...

 

आज का मुरली प्रवचन
  

 Click for More Murlis 

 

19-06-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम महान सौभाग्यशाली हो क्योंकि तुम्हें भगवान वह पढ़ाई पढ़ाते हैं जो अब तक किसी ऋषि-मुनि ने भी नहीं पढ़ी''

प्रश्नः-

ड्रामा की कौन सी भावी तुम बच्चे जानते हो, दुनिया के मनुष्य नहीं?

उत्तर:-

तुम जानते हो इस रूद्र ज्ञान यज्ञ से विनाश ज्वाला प्रज्जवलित हुई है। अब सारी पुरानी दुनिया इसमें स्वाहा हो जायेगी। यह भावी कोई टाल नहीं सकता। यह ऐसा अश्वमेध अविनाशी रूद्र यज्ञ है जिसमें सारी सामग्री स्वाहा होगी फिर हम इस पतित दुनिया में नहीं आयेंगे। इसे ईश्वर की भावी नहीं, ड्रामा की भावी कहेंगे।

गीत:-

मुखड़ा देख ले प्राणी...

ओम् शान्ति। तुम बच्चे भी मनुष्य हो। यह मनुष्यों की सृष्टि है। इस समय तुम ब्राह्मण धर्म के मनुष्य बने हो। बाप शिक्षा देते हैं आत्माओं को। आत्मा को अभी अपने स्वधर्म का पता है कि हम आत्मा इस शरीर को चलाने वाली हैं। आत्मा का यह रथ है। जैसे बाप इस रथ पर आकर सवार हुए हैं, तुम्हारी आत्मा भी इस रथ पर सवार है। सिर्फ आत्मा को यह ज्ञान भूल गया है कि हम आत्मा शान्त स्वरूप हैं। हमारे रहने का स्थान ही मूलवतन में है। यह शरीर हमको यहाँ मिलता है। ऐसे-ऐसे अपने साथ बातें करनी हैं। बाप कहते हैं तुम आत्मा शान्त स्वरूप हो। अगर तुम चाहो हम शान्ति में बैठें तो अपने को आत्मा समझ शान्तिधाम के निवासी समझो। थोड़ा समय शान्ति में बैठ सकते हैं। मनुष्य शान्ति ही मांगते हैं। मन को शान्ति चाहिए - यह आत्मा ने कहा, परन्तु मनुष्य यह नहीं जानते हैं कि मैं आत्मा हूँ। यह भूल गये हैं। एक कहानी भी है ना - रानी के गले में हार पड़ा था और ढूँढती थी बाहर। तो बाप भी समझाते हैं शान्ति तो तुम्हारा स्वधर्म है। बच्चों ने समझा है हम आत्मायें शान्त स्वरूप हैं। यहाँ आई हैं पार्ट बजाने। इन आरगन्स से डिटैच हो जाते हैं तो आत्मा शान्त है। आत्मा अपने स्वधर्म शान्ति में जितना चाहे बैठ सकती है। चाहो हम इस शरीर से काम न करें, तो शान्त में बैठ जाओ। यह है सच्ची शान्ति, इनको तुम ढूँढते नहीं। तुम्हारा स्वधर्म शान्त है। अभी यहाँ पार्ट बजा रहे हैं। बाप द्वारा मालूम पड़ा है, हमने 84 जन्मों का पार्ट बजाया। इन 84 जन्मों के चक्र का कोई को पता नहीं। सिर्फ तुम बच्चे ही समझते हो। पहले हम सूर्यवंशी राजा वा प्रजा थे फिर चन्द्रवंशी सो वैश्य वंशी, सो शूद्र वंशी बनें। अब फिर से हमको सूर्यवंशी बनना है।

तुम बच्चे सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जान गये हो, तुम कितने सौभाग्यशाली हो। बाप तो यथार्थ बात समझाते हैं। यह है ही सद्गति मार्ग। यह समझाना है कि सर्व का सद्गति दाता एक है। अभी जान गये हो हमको बाबा आकर 21 जन्मों के लिए सद्गति प्राप्त करा रहे हैं। बाहर वाले मनुष्य इन बातों को जानते ही नहीं। तुम ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ ही जानते हो। कोई पूछते हैं - तुम बी.के. क्या जानते हो? परीक्षा तो होनी ही चाहिए कि ब्राह्मण वा ब्राह्मणी हैं वा नहीं। अगर तुम ब्रह्मा के बच्चे हो तो सृष्टि चक्र को जरूर जानते होंगे। बाप रचयिता को जानते हो? ऋषि-मुनि आदि तो रचता और रचना को जानते ही नहीं। तो गोया नास्तिक ठहरे। तुम भी नास्तिक थे। तुम भी रचता बाप और रचना के आदि-मध्य-अन्त को नहीं जानते थे। स्कूल में पहले अनपढ़ ही आते हैं। फिर कहेंगे स्कूल में यह-यह पढ़ा है। अभी तुम हो ईश्वरीय पढ़ाई में। परमपिता परमात्मा तुमको पढ़ा रहे हैं। यह बुद्धि में समझना चाहिए। रचता तो एक शिवबाबा ही है। रूद्र ने ज्ञान यज्ञ रचा यह शास्त्रों में भी है। अब रूद्र और शिव परमात्मा में फ़र्क तो कोई है नहीं। यह भी है कि रूद्र ज्ञान यज्ञ से विनाश ज्वाला निकली। सिर्फ रूद्र शिव की जगह कृष्ण का नाम डाल दिया है। है वही गीता। कहते हैं इस ज्ञान यज्ञ से विनाश ज्वाला प्रज्जवलित हुई। तो स्वराज्य के लिए यह ज्ञान यज्ञ है। इसमें पुरानी दुनिया स्वाहा होनी है। यज्ञ में सारी आहुति अर्थात् सामग्री डालते हैं। सब स्वाहा कर देते हैं। तो इस रूद्र ज्ञान यज्ञ में सारी पुरानी दुनिया स्वाहा हो जायेगी। तुम अब राजयोग सीख रहे हो। इस पतित दुनिया में फिर आयेंगे नहीं। यह दुनिया फिर खत्म हो जानी है। तुम जानते हो, नेचुरल कैलेमिटीज आदि सब होंगी। यह सारी नॉलेज तुम्हारी बुद्धि में बैठना चाहिए। शिवबाबा कहते हैं - मेरी बुद्धि में ही सारा ज्ञान है। बाप सत है, चैतन्य है, ज्ञान का सागर है। सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानते हैं। ऋषि-मुनि तो कहते हैं, हम रचता और रचना को नहीं जानते। तुमसे कोई पूछेंगे तुमको क्या मिलता है? बोलो - जिसको बड़े-बड़े ऋषि-मुनि आदि कहते थे कि हम रचता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को नहीं जानते हैं सो हम जानते हैं। रचता बाप के सिवाए रचना के आदि-मध्य-अन्त का राज़ कोई समझा नहीं सकता। रचता ही समझायेंगे। तुमको मालूम है, मक्खियों की भी रानी होती है। रानी के साथ पीछे-पीछे सब मक्खियाँ जाती हैं। रानी अर्थात् माँ के साथ उनका कितना सम्बन्ध है। बेहद का बाप भी आते हैं तो सभी बच्चों को साथ ले जाते हैं। तुम जानते हो - बाबा आया हुआ है, हम आत्माओं को साथ ले जायेंगे - शान्तिधाम में। फिर से हमारा सतयुग का पार्ट शुरू होगा। जिस पार्ट बजाने के लिए तुम यह देवी-देवता पद पा रहे हो। यहाँ तुम आते ही हो - मनुष्य से देवता पद पाने। सब गुण यहाँ धारण करने हैं। इन लक्ष्मी-नारायण जैसा बनना है। इनको दिव्य दृष्टि के सिवाए कोई देख न सके। अभी तुम जानते हो हम सूर्यवंशी देवता बनेंगे। तुम्हारी बुद्धि में है कि स्वर्ग की राजधानी कैसे स्थापन होती है। सतयुग में था ही देवताओं का राज्य परन्तु देवताओं के राज्य में भी फिर राक्षस आदि दिखाये हैं। यह कोई जानते ही नहीं। भारत कितना पवित्र था, महिमा भी गाते हैं सर्वगुण सम्पन्न...। उन्हों के आगे माथा भी टेकते हैं। मन्दिर भी बहुत बने हुए हैं। परन्तु यह पता नहीं कि आदि सनातन देवी-देवता धर्म सतयुग का कब और कैसे स्थापन हुआ? भारत जो इतना ऊंच था, वह नीच कैसे बना? यह किसको भी पता नहीं है। कहते हैं यह भावी बनी बनाई है। किसकी भावी है? वह भी नहीं समझते। ड्रामा की भावी समझें तो समझ में आये। ड्रामा का रचयिता क्रियेटर, डायरेक्टर कौन है? सिर्फ कह देते ईश्वर की भावी। ड्रामा कहने से ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त को जानना चाहिए। सिर्फ किताब पढ़ने से ड्रामा का पता नहीं पड़ सकता है। जब तक जाकर कोई ड्रामा देखे नहीं। जैसे अखबार में भी पड़ा था - एक कृष्ण चरित्र का ड्रामा बना हुआ है। परन्तु देखने बिगर कोई समझ थोड़ेही सकता है। देखेंगे तब समझेंगे ड्रामा में यह सब होना है। तुम बच्चे भी ड्रामा को अभी समझते हो। मनुष्य कहते हैं - वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी का यह चक्र फिरता रहता है। परन्तु कैसे फिरता है, यह किसको पता ही नहीं। नाम भी लिखे हुए हैं - सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग फिर संगमयुग। परन्तु मनुष्यों ने समझ लिया है - युगे-युगे आते हैं। सतयुग त्रेता का भी संगम होता है। परन्तु उस संगम का कोई महत्व नहीं है। वहाँ तो कुछ होता नहीं। यह बातें तुम जानते हो - सतयुगी सूर्यवंशियों ने फिर चन्द्रवंशियों को राज्य कैसे दिया? ऐसे नहीं कि चन्द्रवंशियों ने सूर्यवंशियों पर जीत पाई। नहीं, जो चन्द्रवंशी का राजा होता है तो सूर्यवंशी राजा-रानी उनको राज्य भाग्य का तिलक दे तख्त पर बिठाते हैं। राजा राम, रानी सीता का टाइटिल मिलता है। किसने दिया? कहेंगे सूर्यवंशियों ने ट्रासंफर किया, अब तुम राज्य करो। जो सीन तुम बच्चों ने साक्षात्कार में देखी है। बाकी कोई लड़ाई आदि नहीं लगती है। जैसे किसको राजाई दी जाती है, वैसे देते हैं। उन्हों के पैर आदि धोकर उनको राज्य तिलक देते हैं। वहाँ कोई गुरू गोसाई तो होते नहीं हैं। अब तुम बच्चों की बुद्धि में है हम दैवी स्वभाव वाले बनते हैं। सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी राज्य में हम कितने सुखी होंगे। बाबा हमको दु:ख से निकाल सुख में ले जाते हैं और कोई सुखी बना न सके। साधू लोग खुद भी चाहते हैं - हम शान्तिधाम में जायें। बाप कहते हैं - मैं इन साधुओं आदि का भी उद्धार कर सबको शान्तिधाम में ले जाता हूँ। सन्यासी तो आते ही द्वापर में हैं। स्वर्ग में हम देवतायें ही रहते हैं। वहाँ भी सेक्शन अलग-अलग हैं। सूर्यवंशियों का अलग, चन्द्रवंशियों का अलग फिर बाद में इस्लामी, बौद्धी, सन्यासी आदि जो भी आते हैं, सबका सेक्शन अलग-अलग बना हुआ है। जब हम राज्य करते थे तो दूसरा कोई था नहीं। मूलवतन में भी ऐसी माला नम्बरवार बनी हुई है। आदि सनातन देवी-देवता धर्म वालों की है पहली बिरादरी। फिर और बिरादरियाँ निकलती हैं। यह बिरादरी है बड़े ते बड़ी और दूसरे जो धर्म स्थापक आते हैं - सब उनसे निकले हुए हैं। तुम कहेंगे इस्लामियों की है सेकेण्ड नम्बर बिरादरी। फिर बौद्धियों की बिरादरी थर्ड नम्बर। हम हैं फर्स्ट बाकी हद की और छोटे-छोटे तो लाखों होंगे। यहाँ तो मुख्य हैं 4 बिरादरियाँ। पहले-पहले हम आते हैं फिर इस्लामी, बौद्धी क्रिश्चियन आदि आते हैं। अभी हम नीचे गिर गये हैं। हमको ही 84 जन्म ले पार्ट बजाना पड़ता है। जो अभी लास्ट में हैं, वही फिर फर्स्ट में होंगे। देवी-देवतायें अब पतित होने के कारण अपने को देवी-देवता कहला नहीं सकते। देवताओं को तो पूजते हैं इससे सिद्ध है - उन्हों के बिरादरी के हैं। सिक्ख लोग गुरूनानक को मानते हैं, उनकी बिरादरी के हैं। सतयुग में पहला नम्बर हमारी बिरादरी है। उनसे ऊंच बिरादरी कोई होती नहीं। हम ऊंच ते ऊंच बिरादरी वाले हैं। हम सबसे जास्ती सुख भोगते हैं, फिर वही कंगाल बनते हैं। सबसे जास्ती दु:खी यह हैं। कर्जा भी यह लेते रहते हैं। कितने साहूकार थे, अभी कितने गरीब हैं। सब कुछ गँवा बैठे हैं। यह है ही दु:खधाम। अब बाप फिर तुमको सुखधाम का मालिक बनाते हैं। बाकी सब चले जायेंगे शान्तिधाम। आधाकल्प तुम सुख भोगते हो, बाकी सब शान्ति में रहते हैं। चाहते भी हैं - हम मुक्ति में जायें। सुख को काग विष्टा समान समझते हैं। उनको सुखधाम का अनुभव ही नहीं है। तुमको अनुभव है। महिमा भी गाते हैं परन्तु पतित होने के कारण भूल गये हैं। अब बाप याद दिलाते हैं - हे भारतवासी तुम देवी-देवता धर्म के हो। द्वापर से नाम बदली कर दिया है। देवता धर्म वाले ही पतित बन गये। गाते भी रहते हैं हे पतित-पावन आओ। बाप ने बताया है - तुम कितने जन्म पावन दुनिया में थे। कितने जन्म पतित दुनिया में हैं। अब फिर पावन दुनिया में जाना है। यह पाठशालाओं की पाठशाला है, यज्ञों का यज्ञ है। सारी पुरानी दुनिया इसमें खत्म होनी है। होलिका जलाते हैं, यह सब पर्व अभी के हैं। आत्मा चली जायेगी, बाकी शरीर खत्म हो जायेंगे। यह नॉलेज कोई सन्यासी आदि दे न सकें। गीता में कुछ है परन्तु आटे में लून (नमक) ज्ञान प्राय:लोप हो जाता है। शिवबाबा कहते हैं - हमने यह यज्ञ रचा है, इनमें तन-मन-धन सब स्वाहा करते हो, जीते जी मरते हो। यह ज्ञान तुमको अभी मिल रहा है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमसते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सुखधाम में जाने के लिए अपना दैवी स्वभाव बनाना है। ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त के राज़ को बुद्धि में रख हर्षित रहना है। सबको यही राज़ समझाना है।

2) स्वराज्य लेने के लिए इस बेहद यज्ञ में जीते जी अपना तन-मन-धन स्वाहा करना है। सब कुछ नई दुनिया के लिए ट्रांसफर कर लेना है।

वरदान:-

सर्व आत्माओं पर स्नेह का राज्य करने वाले विश्व राज्य अधिकारी भव

जो बच्चे वर्तमान समय सर्व आत्माओं के दिल पर स्नेह का राज्य करते हैं वही भविष्य में विश्व के राज्य का अधिकार प्राप्त करते हैं। अभी किसी पर आर्डर नहीं चलाना है। अभी से विश्व महाराजन नहीं बनना है, अभी विश्व सेवाधारी बनना है, स्नेह देना है। देखना है कि अपने भविष्य के खाते में स्नेह कितना जमा किया है। विश्व महाराजन बनने के लिए सिर्फ ज्ञान दाता नहीं बनना है इसके लिए सबको स्नेह अर्थात् सहयोग दो।

स्लोगन:-

जब थकावट फील हो तो खुशी में डांस करो, इससे मूड चेंज हो जायेगी।

 

 

 

संग्रहित समाचार

 

आर्टिकल्स

नई टेक्नॉलॉजि(IT)

मनोरंजन

 

MAIN MENU

जीवनपरिवर्तन लेखमाला

ब्रहमाकुमारीज वर्गीकत सेवायें


  1. स्पार्क [SPARC] प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  2. सुरक्षा सेवाएँ प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  3. कला, संस्कृति प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  4. खेल प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  5. ग्राम विकास प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  6. धार्मिक प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  7. न्यायविद प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  8. परिवहन और यात्रा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  9. शिपींग और टुरिझाम की सेवाओं का समाचार
  10. प्रशासक सेवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  11. महिला सेवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  12. मीडिया प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  13. मेडिकल प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  14. युवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  15. वैज्ञानिक और इंजीनियर प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  16. व्यापार एवं उद्योग प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  17. शिक्षा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  18. समाज सेवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  19. राजनितीज्ञ सेवा प्रभाग सेवाओं का समाचार

आर्टिकल्स

सोशल नेटवर्किंग से हमें जुडे़

           

 

विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस


 देश विदेश के सेवाकेंद्रो द्वारा सेवायें


 

 


 

07-03-20 प्रात:मुरली ओम् शान्ति “बापदादा”मधुबन


“मीठे बच्चे-तुम्हें अपने योगबल से सारी सृष्टि को पावन बनाना है, तुम योगबल से ही माया पर जीत पाकर जगतजीत बन सकते हो"

प्रश्न:

बाप का पार्ट क्या है, उस पार्ट को तुम बच्चों ने किस आधार पर जाना है

उत्तर:

बाप का पार्ट है-सबके दु:ख हरकर सुख देना, रावण की जंजीरों से छुड़ाना। जब बाप आते हैं तो भक्ति की रात पूरी होती है। बाप तुम्हें स्वयं अपना और अपनी जायदाद का परिचय देते हैं। तुम एक बाप को जानने से ही सब कुछ जान जाते हो।

गीत:-

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो......

ओम् शान्ति।

बच्चों ने ओम् शान्ति का अर्थ समझा है, बाप ने समझाया है हम आत्मा हैं, इस सृष्टि ड्रामा के अन्दर हमारा मुख्य पार्ट है। किसका पार्ट है? आत्मा शरीर धारण कर पार्ट बजाती है। तो बच्चों को अब आत्म-अभिमानी बना रहे हैं। इतना समय देह-अभिमानी थे। अब अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। हमारा बाबा आया हुआ है ड्रामा प्लैन अनुसार। बाप आते भी हैं रात्रि में। कब आते हैं-उसकी तिथि-तारीख कोई नहीं है। तिथि-तारीख उनकी होती है जो लौकिक जन्म लेते हैं। यह तो है पारलौकिक बाप। इनका लौकिक जन्म नहीं है। कृष्ण की तिथि, तारीख, समय आदि सब देते हैं। इनका तो कहा जाता है दिव्य जन्म। बाप इनमें प्रवेश कर बताते हैं कि यह बेहद का ड्रामा है। उसमें आधाकल्प है रात। जब रात अर्थात् घोर अन्धियारा होता है तब मैं आता हूँ। तिथि-तारीख कोई नहीं। इस समय भक्ति भी तमोप्रधान है। आधा कल्प है बेहद का दिन । बाप खुद कहते हैं मैंने इनमें प्रवेश किया है। गीता में है भगवानुवाच, परन्तु भगवान मनुष्य हो नहीं सकता। कृष्ण भी दैवी गुणों वाला है। यह मनुष्य लोक है। यह देव लोक नहीं है। गाते भी हैं ब्रह्मा देवताए नमः...... वह है सूक्ष्मवतनवासी। बच्चे जानते हैं वहाँ हड्डी-मास नहीं होता है। वह है सूक्ष्म सफेद छाया। जब मूलवतन में है तो आत्मा को न सूक्ष्म शरीर छाया वाला है, न हड्डी वाला है। इन बातों को कोई भी मनुष्य मात्र नहीं जानते हैं। बाप ही आकर सुनाते हैं, ब्राह्मण ही सुनते हैं, और कोई नहीं सुनते। ब्राह्मण वर्ण होता ही है भारत में, वह भी तब होता है जब परमपिता परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण धर्म की स्थापना करते हैं। अब इनको रचता भी नहीं कहेंगे। नई रचना कोई रचते नहीं हैं। सिर्फ रिज्युवनेट करते हैं। बुलाते भी हैं - हे बाबा, पतित दुनिया में आकर हमको पावन बनाओ। अभी तुमको पावन बना रहे हैं। तुम फिर योगबल से इस सृष्टि को पावन बना रहे हो। माया पर तुम जीत पाकर जगत जीत बनते हो। योगबल को साइंस बल भी कहा जाता है। ऋषि-मुनि आदि सब शान्ति चाहते हैं परन्तु शान्ति का अर्थ तो जानते नहीं। यहाँ तो जरूर पार्ट बजाना है ना। शान्तिधाम है स्वीट साइलेन्स होम। तुम आत्माओं को अब यह मालूम है कि हमारा घर शान्तिधाम है। यहाँ हम पार्ट बजाने आये हैं। बाप को भी बुलाते हैं-हे पतित-पावन, दु:ख हर्ता, सुख कर्ता आओ, हमको इस रावण की जंजीरों से छुड़ाओ। भक्ति है रात, ज्ञान है दिन। रात मुर्दाबाद होती है फिर ज्ञान जिंदाबाद होता है। यह खेल है सुख और दुःख का। तुम जानते हो पहले हम स्वर्ग में थे फिर उतरते-उतरते आकर नीचे हेल में पड़े हैं। कलियुग कब खलास होगा फिर सतयुग कब आयेगा, यह कोई नहीं जानते। तुम बाप को जानने से बाप द्वारा सब कुछ जान गये हो। मनुष्य भगवान को ढूँढने के लिए कितना धक्का खाते हैं। बाप को जानते ही नहीं। जानें तब जब बाप आकर अपना और जायदाद का परिचय दें। वर्सा बाप से ही मिलता है, माँ से नहीं। इनको मम्मा भी कहते हैं, परन्तु इनसे वर्सा नहीं मिलता है, इनको याद भी नहीं करना है। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी शिव के बच्चे हैं - यह भी कोई नहीं जानते। बेहद की सारी दुनिया का रचयिता एक ही बाप है। बाकी सब हैं उनकी रचना या हद के रचयिता। अब तुम बच्चों को बाप कहते हैं मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश हों। मनुष्य बाप को नहीं जानते हैं तो किसको याद करें? इसलिए बाप कहते हैं कितने निधनके बन पड़े हैं। यह भी ड्रामा में गूंध है। भक्ति और ज्ञान दोनों में सबसे श्रेष्ठ कर्म है-दान करना। भक्ति मार्ग में ईश्वर अर्थ दान करते हैं। किसलिए? कोई कामना तो जरूर रहती है। समझते हैं जैसा कर्म करेंगे वैसा फल दूसरे जन्म में पायेंगे, इस जन्म में जो करेंगे उसका फल दूसरे जन्म में पायेंगे। जन्म-जन्मान्तर नहीं पायेंगे। एक जन्म के लिए फल मिलता है। सबसे अच्छे ते अच्छा कर्म होता है दान। दानी को पुण्यात्मा कहा जाता है। भारत को महादानी कहा जाता है। भारत में जितना दान होता है उतना और कोई खण्ड में नहीं। बाप भी आकर बच्चों को दान करते हैं, बच्चे फिर बाप को दान करते हैं। कहते हैं बाबा आप आयेंगे तो हम अपना तन-मन-धन सब आपके हवाले कर देंगे। आप बिगर हमारा कोई नहीं। बाप भी कहते हैं मेरे लिए तुम बच्चे ही हो। मुझे कहते ही हैं हेविनली गॉड फादर अर्थात् स्वर्ग की स्थापना करने वाला। मैं आकर तुमको स्वर्ग की बादशाही देता हूँ। बच्चे मेरे अर्थ सब कुछ दे देते हैं - बाबा सब कुछ आपका है। भक्ति मार्ग में भी कहते थे-बाबा, यह सब कुछ आपका दिया हुआ है। फिर वह चला जाता है तो दुःखी हो जाते हैं। वह है भक्ति का अल्पकाल का सुख। बाप समझाते हैं भक्ति मार्ग में तुम मुझे दान-पुण्य करते हो इनडायरेक्ट । उसका फल तो तुमको मिलता रहता है। अब इस समय मैं तुमको कर्मअकर्म-विकर्म का राज़ बैठ समझाता हूँ। भक्ति मार्ग में तुम जैसे कर्म करते हो उसका अल्पकाल सुख भी मेरे द्वारा तुमको मिलता है। इन बातों का दुनिया में किसको पता नहीं है। बाप ही आकर कर्मों की गति समझाते हैं। सतयुग में कभी कोई बुरा कर्म करते ही नहीं। सदैव सुख ही सुख है। याद भी करते हैं सुखधाम, स्वर्ग को। अभी बैठे हैं नर्क में। फिर भी कह देते–फलाना स्वर्ग पधारा। आत्मा को स्वर्ग कितना अच्छा लगता है। आत्मा ही कहती है ना–फलाना स्वर्ग पधारा। परन्तु तमोप्रधान होने के कारण उनको कुछ पता नहीं पड़ता है कि स्वर्ग क्या, नर्क क्या है? बेहद का बाप कहते हैं तुम सब कितने तमोप्रधान बन गये हो। ड्रामा को तो जानते नहीं। समझते भी हैं कि सृष्टि का चक्र फिरता है तो जरूर हूबहू फिरेगा ना। वह सिर्फ कहने मात्र कह देते हैं। अभी यह है संगमयुग। इस एक ही संगमयुग का गायन है। आधाकल्प देवताओं का राज्य चलता है फिर वह राज्य कहाँ चला जाता, कौन जीत लेते हैं? यह भी किसको पता नहीं। बाप कहते हैं रावण जीत लेता है। उन्होंने फिर देवताओं और असुरों की लड़ाई बैठ दिखाई है। अब बाप समझाते हैं-5 विकारों रूपी रावण से हारते हैं फिर जीत भी पाते हैं रावण पर। तुम तो पूज्य थे फिर पुजारी पतित बन जाते हो तो रावण से हारे ना। यह तुम्हारा दुश्मन होने के कारण तुम सदैव जलाते आये हो। परन्तु तुमको पता नहीं है। अब बाप समझाते हैं रावण के कारण तुम पतित बने हो। इन विकारों को ही माया कहा जाता है। माया जीत, जगत जीत। यह रावण सबसे पुराना दुश्मन है। अभी श्रीमत से तुम इन 5 विकारों पर जीत पाते हो। बाप आये हैं जीत पहनाने। यह खेल है ना। माया ते हारे हार, माया ते जीते जीत। जीत बाप ही पहनाते हैं इसलिए इनको सर्वशक्तिमान कहा जाता है। रावण भी कम शक्तिमान नहीं है। परन्तु वह दुःख देते हैं इसलिए गायन नहीं है। रावण है बहुत दुश्तर। तुम्हारी राजाई ही छीन लेते हैं। अभी तुम समझ गये हो– हम कैसे हारते हैं फिर कैसे जीत पाते हैं? आत्मा चाहती भी है हमको शान्ति चाहिए। हम अपने घर जावें। भक्त भगवान को याद करते हैं परन्तु पत्थरबुद्धि होने कारण समझते नहीं हैं। भगवान बाबा है, तो बाप से जरूर वर्सा मिलता होगा। मिलता भी जरूर है परन्तु कब मिलता है फिर कैसे गँवाते हैं, यह नहीं जानते हैं। बाप कहते हैं मैं इस ब्रह्मा तन द्वारा तुमको बैठ समझाता हूँ। मुझे भी आरगन्स चाहिए ना। मुझे अपनी कर्मेन्द्रियां तो हैं नहीं। सूक्ष्मवतन में भी कर्मेन्द्रियां हैं। चलते फिरते जैसे मूवी बाइसकोप होता है, यह मूवी टॉकी बाइसकोप निकले हैं तो बाप को भी समझाने में सहज होता है। उन्हों का है बाहुबल, तुम्हारा है योगबल। वह दो भाई भी अगर आपस में मिल जाएं तो विश्व पर राज्य कर सकते हैं। परन्तु अभी तो फूट पड़ी हुई है। तुम बच्चों को साइलेन्स का शुद्ध घमण्ड रहना चाहिए। तुम मनमनाभव के आधार से साइलेन्स द्वारा जगतजीत बन जाते हो। वह है साइंस घमण्डी। तुम साइलेन्स घमण्डी अपने को
आत्मा समझ बाप को याद करते हो। याद से तुम सतोप्रधान बन जायेंगे। बहुत सहज उपाय बताते हैं। तुम जानते हो शिवबाबा आये हैं हम बच्चों को फिर से स्वर्ग का वर्सा देने। तुम्हारा जो भी कलियुगी कर्मबन्धन है, बाप कहते हैं उनको भूल जाओ। 5 विकार भी मुझे दान में दे दो। तुम जो मेरा-मेरा करते आये हो, मेरा पति, मेरा फलाना, यह सब भूलते जाओ। सब देखते हुए भी उनसे ममत्व मिटा दो। यह बात बच्चों को ही समझाते हैं। जो बाप को जानते ही नहीं, वह तो इस भाषा को भी समझ न सकें। बाप आकर मनुष्य से देवता बनाते हैं। देवतायें होते ही सतयुग में हैं। कलियुग में होते हैं मनुष्य। अभी तक उनकी निशानियां हैं अर्थात् चित्र हैं। मुझे कहते ही हैं पतित-पावन । मैं तो डिग्रेड होता नहीं हूँ। तुम कहते हो हम पावन थे फिर डिग्रेड हो पतित बने हैं। अब आप आकर पावन बनाओ तो हम अपने घर में जायें। यह है स्पीचूअल नॉलेज। अविनाशी ज्ञान रत्न हैं ना। यह है नई नॉलेज। अभी तुमको यह नॉलेज सिखाता हूँ। रचयिता और रचना के आदि, मध्य, अन्त का राज़ बताता हूँ। अभी यह तो है पुरानी दुनिया। इसमें तुम्हारे जो भी मित्र सम्बन्धी आदि हैं, देह सहित सबसे ममत्व निकाल दो। अभी तुम बच्चे अपना सब कुछ बाप हवाले करते हो। बाप फिर स्वर्ग की बादशाही 21 जन्मों के लिए तुम्हारे हवाले कर देते हैं। लेन-देन तो होती है ना। बाप तुमको 21 जन्मों के लिए राज्य-भाग्य देते हैं। 21 जन्म, 21 पीढ़ी गाये जाते हैं ना अर्थात् 21 जन्म पूरी लाइफ चलती है। बीच में कभी शरीर छूट नहीं सकता। अकाले मृत्यु नहीं होती। तुम अमर बन और अमरपुरी के मालिक बनते हो। तुमको कभी काल खा न सके। अभी तुम मरने के लिए पुरूषार्थ कर रहे हो। बाप कहते हैं देह सहित देह के सब सम्बन्ध छोड़ एक बाप से सम्बन्ध रखना है। अब जाना ही है सुख के सम्बन्ध में। दु:ख के बन्धनों को भूलते जायेंगे। गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र बनना है। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो, साथ-साथ दैवीगुण भी धारण करो। इन देवताओं जैसा बनना है। यह है एम ऑबजेक्ट। यह लक्ष्मी-नारायण स्वर्ग के मालिक थे, इन्हों ने कैसे राज्य पाया, फिर कहाँ गये, यह किसको पता नहीं है। अभी तुम बच्चों को दैवी गुण धारण करने हैं। किसको भी दु:ख नहीं देना है। बाप है ही दुःख हर्ता, सुख कर्ता। तो तुमको भी सुख का रास्ता सबको बताना है अर्थात् अन्धों की लाठी बनना है। अभी बाप ने तुम्हें ज्ञान का तीसरा नेत्र दिया है। तुम जानते हो बाप कैसे पार्ट बजाते हैं। अभी बाप जो तुमको पढ़ा रहे हैं फिर यह पढ़ाई प्राय:लोप हो जायेगी। देवताओं में यह नॉलेज रहती नहीं। तुम ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण ही रचता और रचना के ज्ञान को जानते हो। और कोई जान नहीं सकते। इन लक्ष्मी-नारायण आदि में भी अगर यह ज्ञान होता तो परम्परा चला आता। वहाँ ज्ञान की दरकार ही नहीं रहती क्योंकि वहाँ है ही सद्गति। अभी तुम सब कुछ बाप को दान देते हो तो फिर बाप तुमको 21 जन्मों के लिए सब कुछ दे देते हैं। ऐसा दान कभी होता नहीं। तुम जानते हो हम सर्वन्श देते हैं – बाबा यह सब कुछ आपका है, आप ही हमारे सब कुछ हो। त्वमेव माताश्च पिता... पार्ट तो बजाते हैं ना। बच्चों को एडाप्ट भी करते हैं फिर खुद ही पढ़ाते हैं। फिर खुद ही गुरू बन सबको ले जाते हैं। कहते हैं तुम मुझे याद करो तो पावन बन जायेंगे फिर तुमको साथ ले जाऊंगा। यह यज्ञ रचा हुआ है। यह है शिव ज्ञान यज्ञ, इसमें तुम तन-मन-धन सब स्वाहा कर देते हो। खुशी से सब अर्पण हो जाता है। बाकी आत्मा रह जाती है। बाबा, बस अब हम आपकी श्रीमत पर ही चलेंगे। बाप कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र बनना है। 60 वर्ष की आयु जब होती है तो वानप्रस्थ अवस्था में जाने की तैयारी करते हैं परन्तु वह कोई वापिस जाने के लिए थोड़ेही तैयारी करते हैं। अभी तुम सतगुरू का मन्त्र लेते हो मनमनाभव। भगवानुवाच - तुम मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। सबको कहो आप सबकी वानप्रस्थ अवस्था है। शिवबाबा को याद करो, अब जाना है अपने घर। अच्छा।
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:

1. कलियुगी सर्व कर्मबन्धनों को बुद्धि से भूल 5 विकारों का दान कर आत्मा को सतोप्रधान बनाना है।

2. इस रूद्र यज्ञ में खुशी से अपना तन-मन-धन सब अर्पण कर सफल करना है। इस समय सब कुछ बाप हवाले कर 21 जन्मों की बादशाही बाप से ले लेनी है।

वरदान:

निमित्त भाव की स्मृति से हलचल को समाप्त करने वाले सदा अचल-अडोल भव

निमित्त भाव से अनेक प्रकार का मैं पन, मेरा पन सहज ही खत्म हो जाता है। यह स्मृति सर्व प्रकार की हलचल से छुड़ाकर अचल-अडोल स्थिति का अनुभव कराती है। सेवा में भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। क्योंकि निमित्त बनने वालों की बुद्धि में सदा याद रहता है कि जो हम करेंगे हमें देख सब करेंगे। सेवा के निमित्त बनना अर्थात् स्टेज पर आना। स्टेज तरफ स्वत: सबकी नजर जाती है। तो यह स्मृति भी सेफ्टी का साधन बन जाती है।

स्लोगन:

सर्व बातों में न्यारे बनो तो परमात्म बाप के सहारे का अनुभव होगा।

 

महाशिवरात्री संदेश दि. 22 से 28 फरवरी, 2017 रात 12 बजे तक 7 दिनमें 

7 करोंड व्हाटसएप युजर्स को दिया जायेगा महाशिवरात्री का आध्यात्मिक रहस्य

ओमशान्ति मीडिया पत्रिका, बीकवार्ता वेबपोर्टल तथा डॉ. दिपक हरके का संयुक्त उपक्रम

वंडर बुक ऑफ रिकार्ड इंटरनॅशनल, लंदन में दर्ज होगा विश्व किर्तीमान

 

अहमदनगर (प्रतिनिधी) हम प्रतिवर्ष भक्तिभाव से महाशिवरात्री महोत्सव मनाते है, किन्तू यह उत्सव क्या मनाते ? इसके पिछे छिपा आध्यात्मिक क्या है ? इसकी जानकारी कुछ ही लोगो के पास है ? महाशिवरात्री के आध्यात्मिक रहस्य को हम अपने जीवन में समझकर अपने जीवनमें प्रतिपल खुश रहने हेतू महाशिवरात्री संदेश देना आवश्यक है  दि. 22 से 28 फरवरी, 2017 की रात 12 से 7 करोड व्हॉटसअॅप युजर्सको महाशिवरात्रीका आध्यात्मिक संदेश प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओरसे पहूंचाया जायेगा. ओमशान्ति मीडिया पत्रिका, www.bkvarta.com बीकवार्ता वेबपोर्टल तथा डॉ. दिपक हरके का यह संयुक्त उपक्रम है.

 

इसके पूर्व का विश्व विक्रम डॉ. दिपक हरके इनके नाम पर है, दिपावली का आध्यात्मिक रहस्य का ऑडिओ मॅसेज 1 करोड 352 व्हॉटस्अॅप युजर्स को 29 अक्तुबर 2016 को रात 12 बजे से 20 अक्तुबर, 2016 के रात बजे बजे तक भेजकर उन्होने यह उपलब्ध हासिल की थी. महाशिवरात्री का विश्वविक्रमी संदेश प्राप्त करने के लिए 9422288888 इस व्हॉटसअॅप मैसेज पर WR एैसा मॅसेज भेजकर आप यह संदेश प्राप्त कर सकतें है. विश्वविक्रम में सहभागीता पत्र प्राप्त करने के लिए हरएक सहभागी व्यक्ति निर्धारीत राशी जमा कर वंडर बुक ऑफ रिकार्डमें सहभाग प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकतें है . इस विश्वविक्रम का उदघाटन भारतीय क्रीकेट टिम के उपकप्तान अजिंक्य रहणे इनके शुभहस्तोंसे मुंबई के बीकेसीस्थित एमसीए क्लब में सपन्न हूआ. इस उपक्रम के बारें में रहाने ने डॉ. दिपक हरके को बधाई दी तथा ब्रह्माकुमारीज् के मानवसेवा के कार्य की सराहना की. 

 

 

१३ मार्च (पालक्कड:केरला) ध्यान महोत्सव का आयोजन. विभीन्य मान्यवारोंने किया राजयोग ध्यान अभ्यास.

 

31 जनवरी (भूवनेश्वर) वार्षिकोत्सव मनाया गया. सेवाकेंद्र के एक वर्ष पूर्ती पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

 


 

30 जनवरी (विलेपार्ले:मुंबई) सफल सारथी अवार्ड. ट्रान्सपोर्ट एण्ड ट्रॅव्हल्स प्रभागद्वारा यह अवार्ड प्राप्त ड्रायव्हर भाईयों को सम्मानित किया गया.

 


 

29 जनवरी (हैद्राबाद) मुख्यमंत्री महोदय शान्तिसरोवर में. भ्राता एम. चंद्राबाबू नायडूजीने शांती सरोवर भेट की. शांतीसरांेवर के दसवें वर्धापन दिन कार्यक्रम का उदघाटन उन्होंने किया.


 

28 जनवरी (जयपूर:राज.) अंतरराष्ट्रीय खेल सम्मेलन मंें ईश्वरीय संदेश. स्पोटर्स एण्ड फिजिकल एज्युकेशन विषयपर आयोजित इस मम्मेलन में बीके जगबीरभाईने दिया संदेश.


 

27 जनवरी (मडिकेरी:कर्ना.) कर्म की गती गुह्य है. - भगवानभाई सेंट्रल जेल में ब्र.कु भगवानभाई, माऊंट आबू ने दिया ईश्वरीय संदेश


 

26 जनवरी (मंगलौर:कर्ना.) सेंट्रल जेल में दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु भगवानभाई, माऊंट आबू ने दिया ईश्वरीय संदेश.


 

25 जनवरी (मालाड:मुंबई)फिल्म इन्स्टि. में मेडिटेशन रुम का उदघाटन. प्रसिध्द फिल्म निर्देशक तथा निर्माता भ्राता सुभाष घई ने विशअलींग फिल्म इन्स्टि. में मेडिटेशन रुम का उघाटन किया

 


 

24 जनवरी (कटघोरा) आध्यात्मिक समागम एवं सम्मान समारोह संपन्न. नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधीयों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया.


 

23 जनवरी (लातूर:महा.) उर्जा छात्र-क्लब स्थापित. गणतंत्र दिवस के अवसरपर विवेकानंद विद्यालय, सीबीएससी लातूर में महाराष्ट्र उर्जा छात्र क्लब की स्थापना की गई


 

22 जनवरी (बिलासपूर:छ.ग.) आरके नगर में सरस्वती झाँकी. राजकिशोर नगर, बीके रुपा बहनने माँ सरस्वती की महिमा का प्रवचन किया.


21 जनवरी (शान्तिवन) रेडिओ मधुबन वर्धापन दिन. ब्रहमाकुमारीज कम्युनिटी रेडिओ मधुबन का 4 था वर्धापन दिवस मनाया गया.

 


 

20 जनवरी (मालाड:मुंबई) सुरक्षीत रास्ता सप्ताह. एसटी डिपो में हुआ कार्यक्रम.


 

19 जनवारी (केशोद:गुज) यात्रा खुशनुमा जीवन की और कार्यक्रम संपन्न. ब्र.कु.डा. सविता, माऊंट आबूने किया मार्गदर्शन.


 

18 जनवरी (आबूपर्वत:पाण्डवभवन) पिताश्रीजी का स्मृतिदिवस. विश्वशांती दिवस के रुप में समूचे विश्व में मनाया गया.


 

17 जनवरी (विशाखापट्टणम) विधायक महोदय को दिया संदेश. नये वर्ष का संदेश भ्राता विष्णु कुमार राजू जी को बीके शशीकला बहनने दिया 


 

16 जनवरी (मुंबई) 102वीं विज्ञान परिषद में स्पार्क सेवा. मुंबई विश्व विद्यालय में आयोजित इस परिषदमें स्प्रिच्ुअल एप्लीकेशन एण्ड रिसर्च की सुंदर सेवा हुई


 

15 जनवरी (जयपूर) नारित्वदर्शन की सहभागीता. जयपूर अन्तरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टीवल में नारित्व दर्शन को नॉमिनेट किया गया.


 

14 जनवरी (शान्तिवन) रिडिकव्हरींग ऑफ लाईफ. वैज्ञानिक तथा अभियंता प्रभागद्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया


 

13 जनवरी (शान्तिवन) ब्र.कु. करुणाभाईजी का 75 वाँ जनमदिन. ब्रहमाकुमारीज संस्था के मीडिया उपाध्यक्ष तथा मल्टीमीडिया प्रभारी ब्र.कु. करुणाभाईजी के जनमदिन की प्लेटिनम ज्युबिली हर्षोल्हाससे मनाई गई.


 

12 जनवरी (शांतीवन)दादीजी का 99 वाँ जनमदिन मनाया. ब्रहमाकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका ददी जानकीजी का जन्मदिन बहुत ही उमंग उत्साहसे मनाया गया


 

11 जनवरी (मा.आबू) बीके केदारभाई का अभिनंदन किया दादीजीने. राजस्थान सरकारद्वारा उर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त करनेवाले बीके केदारभाई (उर्जा ऑडिटर) का अभिनंदन दादी रतनमोहिनीजी, बीके रमेशभाईजीने किया.


 

10 जनवरी (टिकरापारा:बीलासपूर) बालिका शिक्षा शिविर में सदेश. सरस्वती शिशु मंदिर उच्चस्तर मा. विद्यालय में बीके मंजू बहनने दिया ईश्वरीय संदेश.


 

09 जनवरी (राहूरी:महा.) आज की शाम भगवान के नाम. ब्र.कु. सुरजभाई, मा. आबू, ब्र.कु. गीताबहन पुना तथा उषा बहन राहूरी ने दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु. बद्रिश हेहाडरायने मीडियाद्वारा पहूंचाया संदेश


 

08 जनवरी (कलपेट्टा:केरला) केंद्रीय विद्यालय में दिया ईश्वरीय संदेश. ब्र.कु. भगवानभाई, आबू पर्वत ने  कही नैतिक मूल्यों की बा


 

07 जनवरी (बार्शि:महा.) कुंकूलोक हायस्कूल में ईश्वरीय संदेश. बीके संगीताबहनने दिया संदेश


 

06 जनवरी (केशोद) महान जादुगर विरागभाई हकुभा को दिया संदेश. बी.के. सत्याबहन, तथा बीके शिल्पा बहनने दिया परिचय.


 

05 जनवरी (हरिद्वार) ऋषीकुल में संत स्नेहमीलन, ब्र.कु.मिनाबहनने परमपिता परमात्मा का दिया सत्य परिच


 

04 जनवारी (बंेगलौर) फ्रि आय चेकींग कॅम्प. सेवाकेंद्र की ओरसे आयोजित कॅम्प में सहभागीयों दिया गया संदे


 

03 जनवरी (लिमा,पेरु:फ्रान्स)कोप-20 में ब्रहमाकुमारीज् की सहभागीता. क्लायमेंट चेंज कॉन्फरन्स में ब्रहमाकुमारीजने किया सहभाग


 

02 जनवरी (वाशी:मुंबई) सदभावना सभा में ब्रहमाकुमारीज् सहभाग. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की औरसे आयोजित इस मीटिंग में बहनोंने दिया संदेश


 

01 जनवरी (तिनसुखीया:आसाम) स्वर्णीम युग की पुन:स्थापना. गीता के भगवान को प्रत्यक्ष करने के सम्मेलनको, बी के ब्रजमोहनभाईजी, देहली, ब्र.कु. उषाबहनजी मा. आबू, बीके आशा बहनजी ने किया सम्बोधित

बीकेवार्ता सम्माननिय पाठक संख्या

9807918
आज पढनेवाले पाठक
कल पढनेवाले पाठक
पिछले सप्ताह पढनेवाले पाठक
पिछले वर्ष पढनेवाले पाठक
एक तारीखसे अब तक पढनेवाले पाठक
पिछले मास पढनेवाले पाठक
अब तक की पाठक संख्या
6547
122238
204550
7236469
365725
79675
9807918

Your IP: 193.106.31.130
Server Time: 2021-06-22 00:42:17

ब्रहमाकुमारीज वर्गीकत सेवायें


  1. स्पार्क [SPARC] प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  2. सुरक्षा सेवाएँ प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  3. कला, संस्कृति प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  4. खेल प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  5. ग्राम विकास प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  6. धार्मिक प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  7. न्यायविद प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  8. परिवहन और यात्रा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  9. शिपींग और टुरिझाम की सेवाओं का समाचार
  10. प्रशासक सेवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  11. महिला सेवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  12. मीडिया प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  13. मेडिकल प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  14. युवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  15. वैज्ञानिक और इंजीनियर प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  16. व्यापार एवं उद्योग प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  17. शिक्षा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  18. समाज सेवा प्रभाग की सेवाओं का समाचार
  19. राजनितीज्ञ सेवा प्रभाग सेवाओं का समाचार

  विश्व और भारत महत्वपूर्ण दिवस


 

ब्रहमाकुमारीज वर्गीकत सेवायें

Who's Online

We have 7330 guests and no members online

हमारी अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स्

FrontPage Slide Show

नया मलयालम टीवी चैनल

कोच्चि: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री, माननीय। मुरलीधरन ने ब्रह्म कुमारियों का नया मलयालम चैनल लॉन्च किया - मलयाली को समर्पित राजयोग टीवी मलयालम। यह एक पूर्ण चैनल है जो हमारी ज़रूरत की हर चीज़ वितरित करता है। भारतीय दर्शन विज्ञान और अध्यात्म का सामंजस्य है। यह चैनल ब्रह्म कुमारियों की मानवता की समग्र दृष्टि का प्रमाण है। मंत्री ने अपने…

आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र

मध्यप्रदेश के राज्य कैबिनेट मंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए ब्रह्माकुमारीज को प्रशंसा पत्र प्रदान किया मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन में ब्रह्मा कुमारिस संगठन के प्रयासों की सराहना की। मध्य प्रदेश सरकार में पशुपालन और मत्स्यपालन मंत्री और प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह यादव, मुरैना जिला कलेक्टर, प्रियंका दास के साथ, प्रशासन की ओर से इस…

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर

निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर   ग्वालियर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मेडिकल विंग के स्थानीय सेवाकेंद्र “प्रभु उपहार भवन, माधवगंज लश्कर ग्वालियर” द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं नि:शुल्क दवाइयां वितरण शिविर का आयोजन किया गया।शिविर में परामर्श देनें के लिए डॉ. निर्मला कंचन (स्त्री रोग विशेषज्ञ), एवं…

नई टेक्नॉलॉजि(IT)

मनोरंजन